१३  २०८३ बुधबार | 29 Jul 2026 Wed

नेकपा कञ्चनपुर–१ से प्रत्यक्ष उम्मेदवारम सिफारिस हुइल तिलक भट्ट

नेकपा कञ्चनपुर–१ से प्रत्यक्ष उम्मेदवारम सिफारिस हुइल तिलक भट्ट

  • दिनेश चौधरी
  •     (७ महिना अघि)
  • पाठक संख्या ६८६
  • आगामी संघिय निर्वाचनके लाग नेकपा कम्युनिष्टके तर्फसे ८ जना प्रतिनिधिसँग राजनितिम सक्रिय रहल तिलक भट्टहन कञ्चनपुर निर्वाचन क्षेत्र १ से उम्मेदवार सिफारिस कैक संगठन पार्टी केन्द्रिय कार्यसमितिम पथैल बा।

    वि.सं. २०२७ साल जेठ ७ गते कञ्चनपुरके दोधोरा चादँनीके ग्रामिण क्षेत्रम जन्म हुइलक व २०२८ साल से बेलौरी-०३ खिरियाम स्थायी बसोबास कर्ती आइल भट्ट नेपाली कम्युनिष्ट आन्दोलनके समयसे निरन्तर सक्रिय व्यक्ति हुइत।

    उहाके जन्म सामान्य परिवारम हुइलसे फेन संगठन व समाजम देखैलक संघर्ष कलसे असामान्य देखाइत। वि.सं. २०४० साल वहर शिक्षक बराल सरके वैचारिक प्रभावसे कम्युनिष्ट पार्टीम आवद्ध रहलक भट्ट विद्यार्थी राजनीतिम प्रवेश कर्लक लगत्तै २०४४ सालम सिद्धनाथ विज्ञान क्याम्पसम अनेरास्ववियु (पाँचौँ) के तर्फसे स्ववियु सदस्यम निर्वाचित हुइल।

    तत्कालिन राजनितिक परिवेशम सदस्यम निर्वाचित हुइना भट्टके लाग सामान्य कलसे निरलहन। तर वह सफलतासे उहाहन राजनितिम थरैना यक्थो मार्ग खुलल रलहन। राजनिति आपनसे भारी समाज रुपान्तरणके मार्गदर्शन हुइना कना उद्धेश्य बिक्लक नेता भट्ट २०४६ सालके ऐतिहासिक जनआन्दोलनम सक्रिय भूमिकाम थर्याइल रलह।

    २०४७ सालपाछ भट्टके राजनीतिक यात्रा संगठनात्मक जिम्मेवारीतर्फ उन्मुख हुइलन। श्रीपुर, लक्ष्मीपुर व शंकरपुर क्षेत्र समेत्लक इलाका संगठन कमिटी सदस्यके रूपम उ पार्टी विस्तार व जनसम्पर्कम सक्रिय भूमिका निर्वाह कर्ल। वह अवधिम प्रजातान्त्रिक राष्ट्रिय युवा संघ (प्ररायु संघ) लक्ष्मीपुर गाउँ कमिटीके अध्यक्षके जिम्मेवारी सम्हल्ती युवाहुकन संगठित कर्ना, वैचारिक रूपम प्रशिक्षित कर्ना व आन्दोलनम सक्रिय बनैना कामम उ केन्द्रित हुइल। २०४८ सालके आम निर्वाचनम सक्रिय सहभागिता जनैती उ पार्टी अभियानम आपनहन पूर्ण रूपम समर्पित कर्ल।

    यह वर्ष २०४८/०९/०५ गते नेकपा (एमाले) के संगठित सदस्यता प्राप्त कर्ना उहाके राजनीतिक यात्राके औपचारिक व निर्णायक मोड बन्लन। वाकर पाछ २०४९ म लक्ष्मीपुर गाउँ विकास समिति व कञ्चनपुर जिल्ला विकास समितिके निर्वाचन प्रक्रियाम सक्रिय हुइती स्थानीय तहम पार्टीके उपस्थिति सुदृढ बनाउन योगदान पुगाइल रलह २०५१ सालके मध्यावधि निर्वाचनम फेन उ वस्तहक सक्रिय रलह। २०५१ से २०६१ सम्म साविक लक्ष्मीपुर गाउँ कमिटीके संस्थापक सचिवके रूपम काम कर्ना संगठन निर्माणम उहाके महत्वपूर्ण योगदानके रूपम स्मरणीय बा। यह अवधिमा २०५१ मंसिरम नेकपा (एमाले) जिल्ला सल्लाहकार सदस्यके जिम्मेवारी पाइना पार्टीभित्र उहाके अनुभव, निरन्तरता व परिपक्वताके औपचारिक मान्यता रलहीन।

    उहाके योगदान पार्टी राजनीतिम केल सीमित निहोक। २०५१–२०६३ सम्म लक्ष्मी माध्यमिक विद्यालय, जवदियाके व्यवस्थापन समिति सदस्यके रूपम शिक्षा क्षेत्रके सुधारम उ भूमिका खेल्ल। २०५३ म पुष्पलाल स्मृति प्राथमिक विद्यालय, खिरियाके संस्थापक तथा व्यवस्थापन समिति अध्यक्ष बन्नु कम्युनिष्ट आन्दोलनके सामाजिक उत्तरदायित्व व्यवहारम उतर्लक उदाहरण हो। २०५४ साल उहाके राजनीतिक यात्राके और महत्वपूर्ण मोड बन्लन। साविक लक्ष्मीपुर गाउँ विकास समितिके उपाध्यक्ष पदम सर्वाधिक मतसहित निर्वाचित हुइना जनतासँगके भरोसा व स्वीकार्यताके ठोस प्रमाण रलहन। यह वर्ष नेपालगञ्जम ओरिलक नेकपा (एमाले) के छैटौँ महाधिवेशनम स्वयंसेवकके रूपम खटिनु पार्टीप्रतिके निष्ठा व संगठनात्मक अनुशासनके परिचायक बन्लन।

    २०५५ म प्ररायु संघ कञ्चनपुरसे राष्ट्रिय सम्मेलन प्रतिनिधि, पिपुल्स भोलिन्टियर्स महाकाली निर्देशक तथा २०५६ म केन्द्रीय स्कुल विभागद्वारा सञ्चालित महाकाली अञ्चलस्तरीय प्रशिक्षणम सहभागितासे उहाके वैचारिक व संगठनात्मक क्षमता थप सुदृढ कर्ल । २०५७ से २०६५ सम्म निर्वाचन क्षेत्रीय समन्वय कमिटी सदस्यके रूपम उ पार्टी–जनसम्पर्क व निर्वाचन व्यवस्थापनम महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह कर्ल। तर २०६५ से २०७७ सम्मके अवधि उहाके राजनीतिक जीवनके सक्कुनसे भारी कठिन चरण रलहिन।

    आन्तरिक पार्टी गुटबन्दी व संरचनागत अवरोधके कारण औपचारिक जिम्मेवारीसे टाढा हुइपर्ना फेन उ सिद्धान्त, विचार व आन्दोलनप्रतिके निष्ठाम कब्बुनै सम्झौता निकर्ल। जिम्मेवारी निहुइना फेन आन्दोलनहन धोका निदेना अडान नै उहाके राजनीतिक चरित्रके मूल पहिचान हो। आन्दोलनप्रतिके इमान्दारीके मूल्यांकन एक दिन अवश्य हुइ कना विश्वाससहित उहा धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर्ल। करिब बाह्र वर्षपछि, २०७८ म उ पुनः सक्रिय राजनीतिम घुम्ल।

    २०७८–२०८१ सम्म नेकपा (एकीकृत समाजवादी) सुदूरपश्चिम प्रदेश कमिटी सचिवालय सदस्यके रूपम उ प्रदेशस्तरीय राजनीतिम जिम्मेवारी वहन कर्ल। २०७८ मै सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकार अन्तर्गत भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात राज्यमन्त्रीके स्वकीय सचिवके रूपम काम कर्ती  नीतिगत व कार्यकारी अनुभव फेन हासिल कर्ल। उहाके राजनीतिक जीवनम कौनो आकस्मिक अवसर, पदप्राप्तिके आकांक्षा वा क्षणिक लाभके परिणाम निरलहन। बरु यी यात्रा निरन्तर संघर्ष, संगठन निर्माण, विचारप्रतिके अडान व जनताप्रतिके उत्तरदायित्वके अभ्याससे निर्मित रह। उहाके कम्युनिष्ट चेतनाके प्रारम्भ २०४० सालतिर शिक्षक बराल सरके वैचारिक प्रभावसे हुइलक देखाइत। ओकर पाछ विद्यार्थी राजनीतिम प्रवेश कर्ती अनेरास्ववियु (पाँचौँ) के तर्फसे स्ववियु सदस्य निर्वाचित हुनु उ बेलाके राजनीतिक परिवेशम सामान्य घटना निरह। पञ्चायती निरंकुश व्यवस्थाविरुद्ध सचेत रूपम उभिएके युवाके उ कदम लोकतान्त्रिक चेतनाके स्पष्ट अभिव्यक्ति रह।

     

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