१५  २०८३ शुक्रबार | 31 Jul 2026 Fri

आज रक्षाबन्धन व जनै पुर्णिमा मनैती

आज रक्षाबन्धन व जनै पुर्णिमा मनैती

  • चौधरी खबर
  •     (१२ महिना अघि)
  • पाठक संख्या ३९४
  • हरेक वर्ष साउन शुक्ल पूर्णिमाके दिन मनैना रक्षाबन्धन, जनै पूर्णिमा (ऋषि तर्पणी) पर्व आज देशभर नव यज्ञोपवीत एवम् रक्षाबन्धन धारण क्रक मनैती बाट।

    पूर्णिमाके दिन बिहानसे वैदिक सनातन धर्मावलम्बी लॾया, ताल, तलाउ, पोखरीम जाक लहैना कैक गुरु पुरोहितसे रक्षासूत्र बहन्त ।

    गुरु पुरोहित विधिपूर्वक मन्त्रिएके यज्ञोपवीत एवम् डोरो (रक्षासूत्र) धारण कैक नकारात्मक तत्वसे सुरक्षा प्राप्त हुईना धार्मिक विश्वास बा।

    मानव रक्षाके लाग जप, तप व पूजा कैक मन्त्रिएके रक्षाबन्धन अर्थात् डोरो वैदिक परम्पराके मन्त्रोच्चारण क्रती ब्राह्मण पुरोहित यजमानके दाहिन नाडीम बहन्ना क्रथ ।

    आजके दिन तागाधारी आपन जनै (यज्ञोपवीत) फेर्ना क्रथ । अरुन्धतीसहित कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ व अगस्त्य कैक आठ ऋषिहन पूजा एवम् तर्पण क्ररना हुइलक आजके दिनहन ऋषितर्पणी फेन कथ ।

    वैदिक गुरु परम्परा अनुसार यज्ञोपवीत अर्थात् जनैहन ब्रह्मसूत्र अथवा ज्ञानके धागो समेत कथ । रक्षाबन्धन बाँध् एवम् नयाँ जनै फेर्यार बिहानसे पशुपतिनाथ मन्दिर परिसर, वसन्तपुरके अशोकविनायकलगायत बाग्मती लॾयाके किनार व काठमाण्डौ उपत्यकालगायत देशभरके मठ मन्दिरम भक्तजनके घुइँचो लागल बा ।

    तराई क्षेत्रम भने आजके दिन दिदीबहिनी दाजुभाइहन धर्क बाँहन्मक मनैथ । यसबाट दिदी बहिनी व दाजुभाइकाबीचम प्रेमसम्बन्ध बढ्छ कलसे सामाजिक मान्यता बा ।आब्ब छयी  परम्परा पहाडी क्षेत्रम बढ् लागल बा ।

    काठमाण्डौके उत्तरपूर्वी भेगम रहेको मणिचूड, रसुवाको गोसाइँकुण्ड, ललितपुरको कुम्भेश्वर, सिन्धुपाल्चोकको पाँचपोखरी, धनुषाके जनकपुरधाम, धनुषसागर व गङ्गासागर, जुम्लाको दानसाधु एवम् नवलपरासीके त्रिवेणीधामलगायतके ताल, पोखरी रव कुण्डमा आज बिहानसे मेला लागल बा ।

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